पेंसिल के “लेड” में सीसा नहीं होता!


पेंसिल के “लेड” में सीसा नहीं होता! ✏️

हम रोज़ पेंसिल से लिखते हैं, लेकिन उसकी काली नोक को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। अंग्रेज़ी में इसे “लेड” कहा जाता है, जबकि सामान्य ग्रेफाइट पेंसिल की नोक ग्रेफाइट और क्ले यानी चिकनी मिट्टी के मिश्रण से बनती है। इसमें सीसा धातु नहीं होती। 

पेंसिल की लिखावट हल्की या गहरी क्यों होती है?

इसका संबंध नोक में मौजूद सामग्री के अनुपात से है। क्ले अधिक होने पर नोक कठोर होती है और हल्का निशान बनाती है। ग्रेफाइट अधिक होने पर नोक अपेक्षाकृत नरम होती है और गहरा निशान छोड़ती है। यही वजह है कि अलग-अलग पेंसिलों से बने निशानों की गहराई अलग हो सकती है। 

एक पेंसिल से कितने शब्द लिख सकते हैं?

American Chemical Society के अनुसार, एक औसत पेंसिल में लगभग 45,000 शब्द लिखने लायक ग्रेफाइट होने का अनुमान है। यह निश्चित संख्या नहीं है—इसे औसत अनुमान समझना चाहिए। 

इरेज़र से पहले गलतियाँ कैसे मिटाते थे?

एक और दिलचस्प बात: रबर के इरेज़र इस्तेमाल होने से पहले लोग पेंसिल के निशान मिटाने के लिए ब्रेड का उपयोग करते थे! 

सोशल मीडिया कैप्शन

✏️ नाम “लेड”, लेकिन अंदर सीसा नहीं! आपकी सामान्य पेंसिल की काली नोक ग्रेफाइट और चिकनी मिट्टी से बनती है। इन्हीं का अनुपात उसकी कठोरता और लिखावट का गहरापन बदलता है। और हाँ, रबर के इरेज़र से पहले लोग ब्रेड से गलतियाँ मिटाते थे! 🍞🔍


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